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पूनम शर्मा
Keywords:
डिजिटल युग, संग्रह विकास, महाविद्यालय पुस्तकालय, ई.संसाधन, ई.पुस्तकें, ई.जर्नल, डिजिटल रिपॉजिटरी, सूचना प्रौद्योगिकी, अजमेर, पुस्तकालय प्रबंधन।
Abstract:
वर्तमान डिजिटल युग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology) के तीव्र विकास ने शिक्षाए अनुसंधान तथा ज्ञान के प्रसार की प्रक्रियाओं को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। इस परिवर्तन का प्रभाव पुस्तकालयों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। परंपरागत पुस्तकालयए जो मुख्यतः मुद्रित पुस्तकोंए पत्रिकाओंए समाचार.पत्रों तथा संदर्भ ग्रंथों पर आधारित थेए अब डिजिटल संसाधनों, ई.पुस्तकों, ई.जर्नलोंए ऑनलाइन डेटाबेस, संस्थागत रिपॉजिटरी तथा ओपन एक्सेस स्रोतों को अपने संग्रह का महत्वपूर्ण भाग बना रहे हैं। परिणामस्वरूप संग्रह विकास (Collection Development) की अवधारणाए प्रक्रिया तथा नीतियों में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।संग्रह विकास पुस्तकालय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण घटक हैए जिसके अंतर्गत उपयोगकर्ताओं की शैक्षणिक, अनुसंधानात्मक एवं सूचना संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधनों का चयन, अधिग्रहण, संगठन, मूल्यांकन तथा संरक्षण किया जाता है। डिजिटल वातावरण में संग्रह विकास की प्रक्रिया अधिक जटिल हो गई है क्योंकि पुस्तकालयों को मुद्रित एवं डिजिटल दोनों प्रकार के संसाधनों के बीच संतुलन स्थापित करना पड़ता है। साथ ही सूचना के बढ़ते स्रोतए तकनीकी परिवर्तनए संसाधनों की बढ़ती लागत तथा उपयोगकर्ताओं की बदलती अपेक्षाएँ संग्रह विकास को एक चुनौतीपूर्ण कार्य बना रही हैं।
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य अजमेर शहर के महाविद्यालय पुस्तकालयों में डिजिटल युग के संदर्भ में संग्रह विकास की वर्तमान स्थितिए उपलब्ध संसाधनों तथा उससे संबंधित प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के महाविद्यालय पुस्तकालयों को शामिल किया गया है ताकि संग्रह विकास की नीतियोंए प्रक्रियाओं और समस्याओं का तुलनात्मक दृष्टिकोण प्राप्त किया जा सके। अध्ययन के अंतर्गत पुस्तकालयाध्यक्षोंए पुस्तकालय कर्मियों तथा उपयोगकर्ताओं से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह जानने का प्रयास किया गया है कि डिजिटल संसाधनों के चयनए अधिग्रहणए प्रबंधन और उपयोग में कौन.कौन सी समस्याएँ सामने आ रही हैं।अध्ययन से ज्ञात हुआ कि अधिकांश महाविद्यालय पुस्तकालय डिजिटल संसाधनों को अपने संग्रह में शामिल करने के लिए प्रयासरत हैं, किंतु उन्हें अनेक व्यावहारिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सीमित वित्तीय संसाधन और अपर्याप्त बजट संग्रह विकास की सबसे महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ई.जर्नलों, ई.पुस्तकों और ऑनलाइन डेटाबेस की बढ़ती सदस्यता लागत के कारण अनेक पुस्तकालय आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर पाते। इसके अतिरिक्त तकनीकी अवसंरचना की कमी, उच्च गति इंटरनेट की अनुपलब्धता, कंप्यूटर उपकरणों की सीमित संख्या तथा नेटवर्क संबंधी समस्याएँ भी डिजिटल संग्रह विकास में बाधक सिद्ध होती हैं।
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International Journal of Recent Research and Review
ISSN: 2277-8322
Vol. XIX, Issue 2
June 2026
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PUBLISHED
June 2026
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Vol. XIX, Issue 2
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